कुंडलपुर वाले तुमको जपुं मैं आदूँ याम।
त्रिशला के लाले चरणों में कोटि प्रणाम। अंतरा
१. अखिल निरंजन, भव भय भंजन त्रिशला नंदन,
कलुष निकंदन, मैं रज कण, तूं मस्तक चंदन,
तूं ही तो मेरा तीर्थ धाम ॥ महावीरा…
२. अष्ट कर्म के हो तुम हंता, दर्शन ज्ञान चरित्र अनंता,
मैं निर्बल तूं, अति बलवंता, हाँ शरण में हूँ, तेरी स्वाम ॥ महावीरा…
३. आगम सूत्र है, तेरी वाणी, ज्ञान रुपी, छकणें स्यूं छाणी, करे पृथक वह, दुध और पाणी, हाँ होता है जग का कल्याण ॥ महावीरा.
४. विजय तेरे, चरणों का चाकर, करुणा कर करुणा के सागर, बसो प्रभु तुम मुझ घट आकर, हां तूं ही है मंजिल, तूं ही विश्राम ॥ महावीरा………