महावीर का नाम मंगल
महावीर का नाम मंगल मंगल है । ले लो प्रभु का नाम मंगल मंगल है ।।
१. त्रिशला के लाल दुलारे, सिद्धारथ कुल उजियारे । भक्तों के भाग्य-सितारे, बिहार भूमि के प्यारे ।
स्थान वह मंगल है ।।
२. संयम के पथ पर आए, दिल में इकतारी लाए,
वे कष्टों से नहीं घबराए । परम ज्योति को पाए ।
दिवस वह मंगल है ।।
३. सुन सच्ची शिक्षा पाते, लाखों को पार लगाते ।
पापी जन भी तर जाते, जो चरणों में आ जाते ।
उसी के मंगल है ।।
४. तेरे दर्शन में मंगल है, तेरी तेरी नजरों में मंगल है,
तेरे वाणी में मंगल है । चरणों में मंगल है ।
नाम में मंगल है ।।
५. तेरा प्रतिपल जाप करेगा, वह संकट दूर करेगा । तेरा प्रतिपल ध्यान धरेगा, वह आत्मानन्द वरेगा । ‘सुमन’ के मंगल है ।।
लय : कैसे हो कल्याण…
रचयिता : मुनि सुमेरमलजी ‘सुमन’