यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
तर्ज (Tune): आ लौट के आजा मेरे मीत
भजन के बोल / Lyrics
ओ त्रिशला सुत महावीर
ओ त्रिशला सुत महावीर, ज्ञान की ज्योति जलाओ रे
तुम गंगा के निर्मल नीर, शांति का स्त्रोत बहाओ रे
1. सूरज समान तुम बनकर के आये, जग का अंधेरा मिटाया
चन्दे सी शीतल वाणी तुम्हारी, अमृत रस बरसाया,
तुम सागर समान गंभीर, ज्ञान की ज्योति जलाओ रे
2. कितने परीषह तुमने सहे थे, सुनने से मन कंपाए, अज्ञानी उस ग्वाल बालक ने तेरे कानों में कीले लगाए, अपने प्रण में बड़े तुम धीर, ज्ञान की ज्योति जलाओ रे
3. कष्ट दिये संगम ने फिर भी करूणा रस बरसाया
सर्प चण्ड कौशिक का तुमने, बेड़ा पार लगाया
तोड़ी कष्टों की जंजीर, ज्ञान की ज्योति जलाओ रे
4. राग-द्वेष के बंधन तोड़े, वीतराग कहलाए
तीर्थंकर बन मोह नींद में, सोये मनुज जगाए
बदली लाखों की तकदीर, ज्ञान की ज्योति जलाओ रे
5. समता और समन्वय का, उपदेश दिया सुखकारी
मुनि राकेश सकल विश्व के, तुम उपकारी भारी
हरी जन – जन की सब पीर, ज्ञान की ज्योति जलाओ रे