पर्युषण पर्व आया है, अनोखा रंग, छायाा है
आत्म चिंतन आत्म उत्थान का संदेश लाया है।
① सु सौरस फैली है तप की ये देखोआज कण कण में दैष को धो दिया मनसे समता स्रोत बहाया है
② ये पावन पर्व आया हूँ लेकर इक नया सन्देश
जगाले आत्म शक्ति को मिटाले क्षीणता मन की
साहसी बन विजय वरने का अवसर आज आया है