Aaya Adishwar Bhagwan

अक्षय तृतीया (चमकै अंगणियो)
आया आदीश्वर भगवान, चमकै आंगणियो जी, आंगणियो । बरसी तपरो आज, करसी पारणियो जी, पारणियो ।।
१. मरुदेवी रा लाल, नाभिनन्दन है जी, नन्दन है। 
तारक दीन दयाल, सौ सौ वन्दन है जी वन्दन है ।।
२ राज-रिद्धि ने त्याग, संयम स्वीकार्यो जी, स्वीकार्यो। कितो बड़ो वैराग, मौनी-व्रत धार्यो जी, व्रत धार्यो ।।
३. एक बरस तक आहार, प्रभुजी नहीं पायो जी, नहीं पायो। चेला च्यार हजार, दिलड़ो घबरायो जी, घबरायो ।।
४. बोलै नहीं भगवान, सोचै के करणो जी, के करणो।
 म्हैं तो सब अणजाण, बैठ्या ले शरणो जी ले शरणो ।।
५. बळदां रो भगवान, मुखड़ों क्यूं बांध्यो जी, क्यूं बांध्यो। कितो हुयो नुकसान, अन्न-जल नहीं लाध्यो जी, नहीं लाध्यो ।।
६. भाव भेंटणों थाल, ल्यावै नर-नारी जी, नर-नारी। गज घोड़ा सुखपाल, देवै असवारी जी, असवारी ।।
७. अन्तराय रो अंत, आखिर आवै है जी, आवै है। हस्थिनापुर रै पंथ, प्रभुवर जावै है जी, जावै है ।।
८. महलां स्यूं श्रेयांस, देखै प्रभु प्यारा जी, प्रभु प्यारा। घड़ा भर्या शत आठ, इक्षु रस धारा जी, रस धारा।।
९. उलट भाव स्यूं दान, बरस्या सोनैया जी, सोनैया। पोते रा अरमान, तरज्या अब नैया जी, अब नैया ।।

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