यह विवाह गीत है जो शादी, मांगलिक कार्यक्रमों और पारिवारिक उत्सवों में गाया जा सकता है। A traditional wedding song for marriage ceremonies and family celebrations.
तप री गंगा में
(तर्ज – धरती धोरां री….)
रचयिता : मुनिश्री दिनेश कुमार
तप री गंगा में – ३
तप री गंगा में जो न्हावे, कचरो करमां रो बह ज्यावे, आत्मा उज्जवलतम बण ज्यावे, तप री गंगा में…….
१. तपस्या जीवन ने चमकावे, तप स्यूं भूत-प्रेत भग जावे, तपसी तप री अलख जगावे, तप री गंगा में….
२. आध्यात्मिक औषध है भारी, तन री मन री मिटे बिमारी, तप री करणी है हितकारी, तप री गंगा में….
३. चढ़ते परिणामां रे सागे, तपसी बढ़े सदा ही आगे, म्हाने हलुकर्मी है लागे, तप री गंगा में….
४. तपसी ने म्हे आज बधावां, तपसी रा म्हे गौरव गावां, शुभ भावां रो तिलक लगावां, तप री गंगा में….