भेरुंजी का गीत
भेरुंजी कठ जाया कठ उपज्या भेरुंजी कठौड़ लिया घर बास,
कालुड़ा पोल्यां बधाई जाम पालणो ।
बाई ए बन जाया बन उपज्या बाई ए, खेजड़ लिया घर बास,
कालुड़ा पोल्या बंधाई ज्याम पालणो ।
भेरुंजी एक हालरिय क कारण, भेरुजी सासुजी बोल्या बोल, कालुड़ा.
बाई ए सासुका बोल बड़ा करां, बाई एं देस्यां लाड़ण पुत, कालुड़ा.
भेरुजी एक हालरिय र कारण, भेरुंजी राजीन्द बोल बोल, काल्डा पोल्या.
बाई ए राजीन्द रा बोल बड़ा करां बाई ए देस्यां लाड़ण पुत, कालुड़ा पोल्या.
भेरुजी पीवर का मारग में थारो देवरो भेरुंजी आवती तो जांवती देस्यूं जात, कालुड़ा.
भेरुजी चढ़न चढ़ाव थार बाकला भेरुंजी ओर घाण्यां रो ताजो तेल, कालुड़ा.
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भेरु जी का दूसरा गीत
जी भैरुजी कंठोड़ तो बाजा थांर बाजीया
जी भेरुंजी कंठोड तो लियारे मुकाम ओ मालासी रा भेरु वारी ओ रिगतमल भेरुं कुव पर बैठ्यो बाबो भली कर जी भेरुजी सूरज सामो थांरो देवरो जी
भेरुंजी ध्वजा रे फरुख असमान
ओ कालामतवाला वारी ओ रीगत मल भैरुं कुव पर बैठ्यो बाबो भली कर,
जी भेरुजी कत लख आव थांर बांझडी जी भेंरुंजी कत लख बालुड़ री माय, ओ मालासी रा भेरुं…
जी भेरुजी नौ लख आव थांर बांझडी जी भेरुंजी दस लख बालुड री माय, ओ मालासी रा भेरुं
जी भेरुजी क्या सुन माँग थार बाँझडी जी, भेरुंजी क्या सुण बालुड री माय ओ मालासी रा भेंरु
जी भेरुजी पुतज मांग म्हार बाँझड़ी जी भैरुंजी अन्नघन बालुड़ री माय, ओ काला मतलवाला वारी ओ रीगतभल भेरुं कुंव पर बैठ्यो बाबो भली कर जी।
हां ए बांया पुतज हींड़ थांर पालण हाए बायां अन्नधन भर्या रे भंडार, ओ मालासी रा भेरुं …
जी भेरुं जी चढ़न चढ़ाव थांर बाकला जी भेरुंजी और घाण्या रो ताजो तेल
ओ मालासी रा भेरुं वारी ओ रीगत मल भैंरु कुव पर बैठ्यो बाबो भली करजी ।