“आलीजा थारी भांगडली”
ज्याओ हो परदेश् थे सुणल्यो म्हारी बात,
सौतण र मेहला म मना लिया ना रात,
जैपुर जाओ तो महार तानी रखड़ी भी ल्याजो जी,
कोई सौतण र घरा मत ना जाज्यो जी आलीजा
मत ना जाज्यो जी आलीजा, थारी भांगडली
चढ़ती भांगडली आ तो ओला झोला खाय,
कोईउत्तरती भांगडली, गोडा तोडओआलीजा —
बीकाने जाओ तो महार तानी रसगुल्ला भी ल्याजो जी को ई सौतण न रसगुल्ला ना खुवाज्जो जी ,आलीजा था री भांगडली
कोटा बूंदी जाज्ओ महार तानी पायलडी भी ल्याजो सा कोई सौतण रा भरमाया मतना रीजो जी आलीजा मानो बातडली
जौधाणे जावो तो महार तानी बंगड़ी भी ल्याजो सा कोई सौतण र घरा मत ना जाज्यो जी आलीजा था री भांगडली
जैसान में जावो तो महार तानी टेवटियो भी लाईजो सा, कोई सौतण री बातआ म मतना आईज्यौ जी बादिला थारी भांगडली