(तर्ज – फिरकी वाली)
श्याम आराधना
ओ मुरली वाले, तू मुरली बजाना नही तरसाना
इस मुरली की तान से, तेरी मुरली बजे है बड़ी शान से
मुरली बजायी तूने रास मंडल में राधे के मन भाय गई संग मे थी जितनी भी सखियां वो दोड़ी -२ आय गयी
हेनंदलाला मदन गोपाला कैसा जादू डाला
तेरी मुरली ने जान मेरी लेली, सुनी जब ध्यान से
मुरली की धुन पर मीरा दीवानी छोड़ दिया था जग सारा भक्ति में तेरी खो गई इतनी लेकर मनका इकतारा ।। कृष्णकन्हैया, रास रचैया दाउजी के भैया
जहर पीकर, वोनाम तेरा ले कर तो तर गई संसारसे
जब भी होगी धर्म की हानि भारत मे मै आऊं गा
भक्तों की रक्षा करने खातिर, चक्र सुदर्शन लाऊंगा हेबनवारी हे गिरधारी, जय -२ रास बिहारी
अब तो आजा दरश दिखलाजा, तू बात मेरी मानके