(लय- आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं)
गुरुवर ( सतिवर, मुनिवर) को पाकर नगरी में धरती का कण-2 महक रहा
एक स्वरसे, एक लय से नन्हो का मन चहक रहा हो गुरुवर स्वागतम् गुरु वर स्वागतम्
① आराध्य तुम्हारे दर्शन करके दशों दिशाएँपुलकित है
चरण शरण को पाकर तेरी जन-2 कामन हरषित है।
। जहाँ भीदेखे आज हमने हर मानस समर्पित है
श्रद्धा के स्वरों का सरगम चहुं दिशायें गुंजित हैं
स्वर्णिम इन घड़ियों को पाकर मन मचल रहा गुरु वर स्वागतम् गुरु वर स्वागतम्
② युग प्रधान युग पुरुष तुम्हे वन्दन अभिन्दन करते हैं।
महाप्राण इस स्वर्णिम पल में जीवन धन्य समझते है
हम नन्हे तेरे स्वागत यही भावना भरते हैं
गुरु वर स्वागतम्गु,रु वर स्वागतम्
सुभाशीष दो बढ़ने का हम बच्चों का मन ललक रहा
ज्ञान शाला का हर वालक हर्षित होकर पुलक रहा
गुरु वर स्वागतम्गु,रु वर स्वागतम्