कंटालिया गया है क्या? सिरीयारी गया है क्या,
हो मितवा रे कुछ भीनही पता रे ,मितवा कुछ भी नही पता,
ऊं भिक्षु जय भिक्षु ओ मितवा रे जपले यही सदा ( ) हो मितवा होगा तेरा भला
① क्या कभी तूने देखी अपने बाबा की सूरत हो हो हो–
हाँ अभी मैने देखी अपने बाबा की मूरत बैठा वो वंदन मुद्रा में ,
अपने मस्तक को लिया झुका – ऊंभिक्षु जय भिक्षु ओ मितवा रे
धीर गंभीर सिकंदर वीर था बड़ा धुरंधर ,ढह गई बाधाएं बूंद बन गया सmanदर ,
बीज तेरापंथ का बोकर कल्पवृक्ष इसको बना दिया,हो मितवा रे
दिया है तुमने नारा,देख रहा जग सारा हो हो हो-२
गुरु की महिमा जानो, इनकी सब बात मानो-२
चल पड़ा अपनी मंजिल को कारवां बनता चला गया
ऊं भिक्षु जय भिक्षु ओ मितवा रे जपले यही सदा ( ) हो मितवा होगा तेरा भला