यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
कंटालिया गया है क्या? सिरीयारी गया है क्या,
हो मितवा रे कुछ भीनही पता रे ,मितवा कुछ भी नही पता,
ऊं भिक्षु जय भिक्षु ओ मितवा रे जपले यही सदा ( ) हो मितवा होगा तेरा भला
① क्या कभी तूने देखी अपने बाबा की सूरत हो हो हो–
हाँ अभी मैने देखी अपने बाबा की मूरत बैठा वो वंदन मुद्रा में ,
अपने मस्तक को लिया झुका – ऊंभिक्षु जय भिक्षु ओ मितवा रे
धीर गंभीर सिकंदर वीर था बड़ा धुरंधर ,ढह गई बाधाएं बूंद बन गया सmanदर ,
बीज तेरापंथ का बोकर कल्पवृक्ष इसको बना दिया,हो मितवा रे
दिया है तुमने नारा,देख रहा जग सारा हो हो हो-२
गुरु की महिमा जानो, इनकी सब बात मानो-२
चल पड़ा अपनी मंजिल को कारवां बनता चला गया
ऊं भिक्षु जय भिक्षु ओ मितवा रे जपले यही सदा ( ) हो मितवा होगा तेरा भला