Pathar Ki Murat Bol Uthi

(लय- म्हारा हरिया वन रा सुवटिया)
पत्थर की मूरत बोल उठी क्या मुझे मनाने आया है
तेरे घर में जननी तरस रही क्या तुझे तरस नहीं आया है 
पत्थर की मूरत बोल उठी क्या मुझे मनाने आया है
घर में तेरी मैया भूखी है क्या उनसे भोजन पूछी है 
मुझे भोग लगाने को बेटा तू छप्पन भोग संग लाया है
 प्यासी तेरे घर में माँ बेठी-2 वो बूंद-2 को तरस रही 
 मुझे पानी पिलाने को भरकर चाँदी की झारी लाया है 
तेरी एक झलक करे पाने को कब से तेरी मैया तरस रही मेरी एक झलक पाने को तू,  मीलो चलकरके आया है 
तू अपनी माँ को मना लेना सीने से उसे लगा लेना 
तेरे सारे कष्ट मिट जायेगे क्यों मुझे मनाने आया है

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