।। श्री गुरुदेव वन्दना ।।
(तर्ज-होठों से छूलो तुम…)
आये है शरण तेरी, गुरूदेव कृपा कर दो,
इस दीन दुखी मन में, आनन्द सुधा भरदो ।। टेर ।।
बड़ी दूर से चलकर मैं, तेरे द्वार पे आया हूँ,
श्रद्धा के सुमन चुनकर, दिल में भर लाया हूँ,
स्वीकार करो मुझको, चरणों मे जगह दे दो ।।१।।
कैसे में करूँ पूजा, कोई विधि नहीं जानूँ,
तेरा स्वरूप गुरूवर, ईश्वर से बड़ा मानूँ,
भक्ति का दान अब तो, किरपा निधान दे दो ।।२।।
सत्संग सुधा गुरूवर, तेरे दर पे बरसती है,
जिसके नसीब ऊँचे, उसे संगत मिलती है,
इस अमृत के रस से, जीवन को मेरे भर दो ।।३।।
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