हम विनय सुनाने आये है
(तर्ज दिल लूटने वाले जादूगर … मदारी)
हम विनय सुनाने आये हैं, महावीर तुम्हारे चरणों में।
मन सुमन चढ़ाने आये हैं, महावीर तुम्हारे चरणों में ।। तुम ज्योतिपुंज तुम दया निधि, हम दीन हीन संसारी हैं। दुःख पीड़ित 2 हैं हम पड़े हुए, महावीर तुम्हारे चरणों में।।1।। हम विनय सुनाने आये हैं
जग डूब गया जब हिंसा में, तुमने आ उसे उबारा था। वापस आओ 2, जग कहता है, महावीर तुम्हारे चरणों में।।2।। हम विनय सुनाने आये हैं
यह भव्य वाटिका उजड़ रही, पापों की नदियाँ बहती है। हे पाप ! 2 विनाशक शक्ति सदा, महावीर तुम्हारे चरणों में।।3।।
हम विनय सुनाने आये हैं संदेश तुम्हारे अमर सदा, कहे ‘कुमुद’ उन्हें अपनाएँगे। शत कोटि नमन शत कोटि नमन, महावीर तुम्हारे चरणों में।।4।। हम विनय सुनाने आये हैं …जय जिनवर, जय तीर्थंकर
(तर्ज : देख तेरे संसार की हालत)
जय जिनवर, जय तीर्थंकर,
जय चौबीसी भगवान साधु-श्रावक करे प्रणाम।
आप तिरे औरों को तारें, भरत क्षेत्र भगवान साधु-श्रावक करे प्रणाम ।।
ऋषभ देवका कीर्तन करते, अजित नाथ को वन्दन करते सम्भवनाथ का नाम सुमरते, अभिन्नदन को चित्त में धरते जय सुमति, जय पद्मप्रभु, जय चौबीसी भगवान।।
साधु ।।
सुपार्श्वनाथ का कीर्तन करते, चन्द्र प्रभु को वन्दन करते सुविधि नाथ का नाम सुमरते, शीतल प्रभु को चित्त में धरते जय श्रेयांश, जय वासुपूज्य, जय चौबीसी भगवान । । साधु ।।
विमलनाथ का कीर्तन करते, अनन्तनाथ को वन्दन करने धर्म नाथ का नाम सुमरते, शान्तिनाथ को चित्त में धरते जय कुन्थु, जय अरनाथ, जय चौबीसी भगवान।।
साधु ।। मल्लिनाथ का कीर्तन करते, मुनिसुव्रत को वन्दन करते नमिनाथ का नाम सुमरते, अरिष्ठ नमि को चित्त में धरते जय पारस, जय महावीर, जय चौबीसी भगवान । । साधु ।।
अनन्त सिद्ध का कीर्तन करते, विहरमान को वन्दन करते गणधर प्रभु का नाम सुमरते, गुरुदेव को चित्त में धरते केवल शिष्य विनय करता, जय चौबीसी भगवान । । साधु ।।
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कभी वीर बनके कभी महावीर बनके
(तर्ज: कभी राम बनके कभी श्याम बनके)
कभी वीर बनके, महावीर बनके, चले आना प्रभु चले आना
तुम ऋषभ रूप में आना, तुम अजित रूप में आना ।। सम्भवनाथ बन के, अभिनन्दन बनके, चले आना प्रभुजी चले आना। । कभी ।।
तुम सुमति रूप में आना, तुम पद्म रूप में आना ।। सुपार्श्वनाथ बन के, चन्द्र प्रभु बन के, चले आना प्रभुजी चले आना। । कभी ।।
तुम सुविधि रूप में आना, तुम शीतल रूप में आना ।। श्रेयांस नाथ वन के, वासुपूज्य बनके, चले आना। प्रभु चले आना।। कभी ।।
तुम विमल रूप में आना, तुम अनन्त रूप में आना ।। धर्मनाथ बन के, शान्तिनाथ बन के, चले आना प्रभुजी चले आना चले आना।। कभी ।।धर्मनाथ बन के, शान्तिनाथ बन के, चले आना प्रभु चले आना।। कभी ।।
तुम कुन्थु रूप में आना, तुम अरह रूप में आना ।। मल्लिनाथ बन के, मुनिसुव्रत बन के चले आना प्रभुजी चले आना। । कभी ।।
तुम नमिनाथ रूप में आना, तुम नेमिनाथ रूप में आना।। पारसनाथ बन के, महावीर स्वामी बन के, चले आना। प्रभुजी चले आना। । कभी ।।
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