यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
श्री महावीर स्तवन झूले, पलने झूले
तर्ज (Tune): बच्चे मन के सच्चे ….. दो कलियाँ
भजन के बोल / Lyrics
झूले, पलने झूले, सारे जग के तारण हारे।
इन्द्र इन्द्राणी हर्ष मनाये, आकर द्वार तुम्हारे ।। झूले
चेत सुदी तेरस का दिन, हर्षित मात-पिता सब जन।
चारों दिशी मंगल छाया, सबने सुर सरगम पाया ।।
देव दुंदुभि बजने लगी, छुम छुम रंभा करने लगी।
सिद्धारथ-त्रिशला के कुल में, जनमे वीर हमारे ।।। ।।
झूले पलने झूले …
कुण्डलपुर की डगर-डगर, शाम सुबह और आठ प्रहर।
वर्द्धमान का सुमीरन कर, थकते हैं ना नारी नर।।
दुःख दरिद्र मिटाने को, सुख अमृत बरसाने को।
पञ्च महाव्रत को समझाने, स्वामी आप पधारे।। 2 ।।
झूले पलने झूले …
चौदह नियम की गरिमा है, इस पलने की महिमा है।