तर्ज :- ( तू ही मेरा मन्दिर तुम्ही मेरी पूजा)
तू ही मोक्षगामी प्रभु पार्श्व स्वामी,
तेरे चरण में मेरी वन्दना है।
नहीं कोई साथी जहाँ में है मेरा,
जीवन है सूना छाया अन्धेरा,
हे दीन बन्धु, तूं ही ज्ञान सिन्धु,
करूँ तेरी भक्ति यही भावना है ।। १ ।। तू ही मोक्ष
कहूँ किसको मेरी दुखी दास्ताँ ये,
व्याकुल है मनवा नहीं चैन पाये,
तूं ही मुक्ति दाता, भव-भव छुड़ाता,
ले लो शरण में यही कामना है ।। २ ।। तू ही मोक्ष
आशा निराशा में जोवन गुजारा,
खोया है सब कुछ मिला न किनारा,
नहीं कोई ऐसा, प्रभु तेरे जैसा, करे
“वीर मण्डल” तेरी प्रार्थना है ॥ ३ ॥ तूं ही मोक्ष