Viram Gun Gambhiram

तर्ज :- (बच्चे मन के सच्चे )
अस्थाई
वीरम् गुण गम्भीरम्, माता त्रिशला के प्यारे, परमानन्द जिनन्द, हो तुम जिन शासन के उजियारे ।
अन्तरा
दीनदयालु जगदीश्वर, हे करुणामय हे ईश्वर,
 ऐसी शक्ति दो हमको, रहे शरण तेरी जिनवर,
 तुम करुणा के सिन्धु हो, दीनजनों के बन्धु हो,
 सुनकर महिमा तेरी भगवन्, आये हाथ पसारे । वीरम् ।। १ ।।
परमातम शिव सुखगामी, पार ब्रह्म अन्तर्यामी, 
शान्ति सुधा के सागर हो, कष्ट हरो सबके स्वामी
, तेरी दया जो हो जाये, मुक्ति का पथ मिल जाये,
 “वीर मण्डल” की सुनलो विनती, आये तेरे द्वारे ॥ वीरम् ॥ २ ॥

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