चोबीस भगवान की स्तुति अलग-अलग लय मे
राग-पारस पूजन द्यो
पारस पूजन दयो।
पारस पूजन में गई कोई ले तपस्यारी भेंट।पारस पूजन दयो
पहला ऋषभनाथ बानस्यां कोई दूजा अजितनाथ देव। प्रभुजी ने भजवा दियो
अगणा संभवनाथ बानस्या, कोई चौथा अभिनन्दनदेव पारस पूजन दो
साचे मन स्यू पूजतां, म्हारा होसी बेड़ा पार प्रभुजी नै– पारस पूजन मैं गई कोई भर मोत्यां रो थाल। प्रभुजी नै भजवा दो
भजवा द्यो रे कर्म कटवा दयो, म्हाने जाणो मुगत रै माय। पारस पूजन दयो( इसी प्रकार आगे नाम लेने हैं।)
(राग-उग आई किरणां, बीसूंज गयो चांद )
उग आई किरणां, बिसूंज गयो चांद।। ध्रुव ।।
पहला ऋषभनाथ बानूं (वंदन) जिणराय, दूजा अजितनाथ दीनदयाल अगणा संभवनाथ बानूं जिणराज, चौथा अभिनन्दन दीनदयाल
ज्ञान रूपी गजरो संतोष री घडी, दूर स्यूं पधार्या महाराज सा बन्दना करी
(इसी प्रकार आगे नाम लेने हैं।)
राग-आज रो सिंगोड़ो भावै
छोटी सी शासन म्हारे. आंगण में रिमझिम खेले, आंगणै रिमझिम खेलै, तपस्या वाली रै मुंडे बोले।
पहला ऋषभनाथ वानस्या, म्हारी शासनमाता
दूजा अजितनाथ देव हो. म्हारी शासन माता ।।१।।
अगणा संभवनाथ बानस्या, महारी शासन माता ॥२॥
चौथा अभिनंदन देव हो. म्हारी शासन माता
छोटी सी शासन म्हारे आंगणे में रिमझिम खेले
आंगण में रिमझिम खेलै, तपस्यां वाली रे मुढे बोले ॥
(इसी प्रकार आगे नाम लेने हैं।)