Ma Dede Shubh Ashish, Aaye Jijaji, Mahafil Me ,(Vidayi Geet,)

Vidayi geet 1

मां देदे शुभ आशीष, लगाकर शीश सुखी हो जाऊं अपना घर स्वर्ग बनाऊं, 
अपना कर्तव्य निभाऊं
 गोदी में स्वर्ग का सुख पाई मां 
कभी ना गर्म हवा खाई मां 
इस ममता को हाथ मैं कैसे भुलाऊं 
अपना घर अपना सारा सुख वार दिया 
प्राणों से बढ़कर प्यार किया 
उपकार का बदला कैसे बोल चुकाऊं 
अपना घर मां तेरी याद जब आयेगी, 
रो रो हिचकी बंध जायेगी 
प्यारे पीहर को छोड के कैसे जाऊं 
अपना घर रूठी को कौन मनायेगा
 मनुहार से कौन जिमायेगा
 अपने सुख दुख की बातें किसे सुनाऊं 
अपना कर्तव्य मां मुझको नहीं भुला देना, 
भैया को भेज बुला लेना । 
उत्तर देना जब पत्र तुम्हें भिजवाऊं अपना कर्तव्य ***
Vidayi geet- 2
आये जीजा जी लाये बाराती लै गये बनी को साथ 
देखो कैसी रीत रीवाज
दादाजी की राज दूलारी, दादी जी की प्राणो से प्यारी सबके प्यार को छोड़ के देखो जा रही ससुराल
देखो कैसी रीत रीवाज
आए जीजाजी
(इसी प्रकार पापा-मम्मी, काका-काकी, भैया-भाभी सभी नाम लेना।
***
विदाई ,3
महफील में जल उठी शमा परवाने के लिए लड़की हुई है दुनियां में बिछुड़ाने के लिए दादाजी ने आशीश देकर, आज लाडली को विदा किया 
दादीजी ने आशीष देकर, झर -झर नीर बहा दिया आंसु आए आंखो से विदाई के लिये 
लड़की हुई है दुनियाँ में महफिल में जल उठी

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