Babul Ki Duwaye, Aa Ladesar Gangour, Dil Ki Duwaye,Ab Sasriye Jao (Vidayi Geet)

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.

विदाई गीत 1

बाबुल की दुआयें लेती जा जा तुझको सुखी संसार मिले मैके की कभी ना याद आये ससुराल में इतना प्यार मिले नाजों से तुझे पाला मैने, कलीयों की तरह फूलों की तरह बचपन में झुलाया है तुझको बाहों ने मेरी झुलों की तरह मेरे बाग की ए नाजुक डाली तुझे हर पल नई बहार मिले मैके की कभी
जिस घर से बन्धे है भाग तेरे, उस घर में सदा तेरा राज रहे होठों पे हंसी की धुप खीले, माथे पे खुशी का ताज रहे कभी जिसकी ज्योती ना हो फीकी तुझे ऐसा रुप श्रृंगार मिले मैके की कभी
बिते तेरी खुशीयों की घडीयां, आराम की ठण्डी छांवो में कांटा भी न चुभने पाये कभी मेरी लाडली तेरे पांवो में
***
विदाई गीत 2
तर्ज -आ बाबासारी लाडली
आ लाडेसर गणगौर बनी सासरीय चाली रे 
छोड़ बाबुल को हेत प्रीत सायब स्युं पाली रे ॥ आ लाडोसर हथलेवो जोड्यो बाई को करने लगे विदाई रे बागां मायली कोयलड़ी आ आज बिछुड कर जासी रे 
मण मण का पग धरती बाई, बाहर चाली रे ॥ आ नैणा नीर बहे बाबुल के बिलखै जामण जाई रे
 दादा दादी आंसु पूछे, रोवे भाई भौजाई रे 
बिलखी विलखी संग की सहेल्यां साथ चाली रे ॥ आ लाडोसर फेर्यो सीर पर हाथ बाई के मोटर में बैठाई रे ।
दायजो तो दियो घणेरो भातो साथ बन्धाई रे । 
सुनी कर गई पोल बाई परदेशां चाली रे । आ लाडोसर
विदाई गीत 3

तर्ज (Tune): – दिलके अरमा आंसुओ

भजन के बोल / Lyrics

दिल की दुआ आंसुओं में बहगई
अपनी होकर भी पराई हो गई
बचपन तो इक याद बन कर रह गई – २
साथ सखियों का तो देखो छोड़ चली बेटी का तो आज भी है ये धर्म -२ दिल की दुआ
दोनों कुल की लाज को निभाती चली दिल की दुआ…
चाहे तुझ पर कैसे क्यूं ना हो सितम – २
हर सितम को मुस्कराती सहती चली दिल की दुआ…
अपनी होकर भी
विदाई 4
अब बाई सासरीय जावो, नयो संसार बसावो, 
मायड़ देव थान आशीषड़ी 
पालपोस थान मोटी कीनी, आज हई है पराई दूर देश स्यूं हंसो आयो, ले गयो तन उड़ाई 
हंसा रो सन्मान करीजे सदा केण में रीजे
 मायड़ देव 
सोलह बरस रही इण घर म बिछड़ रही है आज जीव घणो ही दूःख पाव, पण इणरो नहीं इलाज
बेड़ी आज पड़ी थार पग में आई है रीत जग मं… मायड देव….
तन मन स्यूं पति सेवा करणो पेलो थारो काम
 नारी धर्म निभाणो बाई, राजी होसी राम
 सब स्यूं मीठी बात करीजे झगड़ स्यूं दूर रेइजे 
सासु थारी माता है और सुसरो पिता समान 
देवर जेठ है भाई थांरा, राखी सबको 
मान काण कायदा स्यूं तू रीजे चोखी शोभा लेइजे दिवराणी – जीठाणी स्यूं तु मती करजे तकरार 
नणदल बाई स्यूं राखीजे प्रेमको व्यवहार मायड़ देव म

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top