विदाई
छोटी सीउम्र परणाई ओ बाबासा काई
थारो कर्यो मै कसूर ,
इतरा दिना तो म्हाने लाड़ लडायो अव क्यूं करीथे म्हाने दूर
थारे पिपलिय री भोली चिड़कली चाओतो उड़ उड़ जाउसा
हूं तो बाबोसा थार खुट री गवडली, टोरो जठ टूर जाउसा,
भेजो तो भेजो सा मरजी है थारी, सावण में बुलाई जो जरूर
थां घर जन्मी थां घर खेली
अब घर भेजो दूजे,
आगे बढतो पग पाछो पड़े, म्हारो कालजियो थरथर धूजे
मुंडे सू काई बोलू म्हारा आसूडां बोले हिवडो भरियो है भरपूर