(लय – खड़ी नीम के नीचे मै तो एकली)
भात भरण म्हारो वीरों आयो,मंगल मुहूर्त शुभ घड़ी,
घर र द्वारे बहन उतारे, आओ आरती खड़ी खड़ी,
सोने केरो सूरज उगीयो बाबूजी र राज जी- २,
पीहरीय रो सूरज उगियो आंगणीये महार आज जी,
मांको जायो लेकर आयो झिलमिल तारा की चुनडी —–
इण चुनड़ र हर धागे में मां की ममता झलक रही–२
चारों पल्ला चुनड़ र आशीष पिता की बरस रही_२
किरन्या बरसन लागी म्हारे, स्नेह हरख रि चुनडी
जुग जुग जियो भाई भावज, खैर मनावे बेनडी