यह सांस्कृतिक और परंपरागत गीत है। A cultural and traditional song.
बरसो म्हारा काला बादल बरसो, सवाया जी
बरसो( पिता पुत्र का नाम )आ बेल्या थारी जी
खोलो कड़ीया को फेंटो रालो रुपैया जी
थांरा रुपैया म्हारो थाल भरीज जी
थाल भरीज म्हारो बनड़ो परणीज जी
बनड़ो परणीज म्हारो मनड़ो हुलसीज जी
बरसो म्हारा गुदल्या बादल बरसो सवाया जी
पीहर वालों का इसी तरह नाम लेना)
बीरा :-
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पलक बिछावा म्हे तो थाने बुलावा जी-२
भात भरण बेगा आवो कृष्णमुरारी जी, गीत सुणावा जी कुंकुं पत्री तो थारे, मंदिर में मेली जी-२
एक बहानो मत किज्यो गिरधारी जी गीत सुणावा जी
नरसी मेहता र आया, म्हार भी आवो जी २
नानी बाई सो चीर ओढावो गिरधारी जी गीत सुणावां जी ऊबी थारी बहना पुकारे जी- २
द्वार प नो राधा-रुक्मण
ग्वाल बाल संग आवो कृष्ण मुरारी जी, गीत सुणावा जी
अबके नहीं आया कान्हा मुश्किल होय जासी जी – २
भक्ति रो विश्वास मिट ज्यासी गिरधारी जी- गीत सुणावा जी
पिया रखडी लेज्या, भरीया बहन घर भात ।
गोरी कैया जाव नूतण नहीं आई म्हारी वेन
पिया बान कोइएन जाण, आपान जाण जग ससार । पिया भात भरोला सूरजी तपेलो सवापोर,
पिया धर्म नणद रो धीवड़ न देवे जुग ससार
छोटी सी गोरी कितनो क दियो उपदेश ।
पिया गजरा लेज्या (
इस तरह सभी गेणाका नाम लेवणा)
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