(लय : भाव-भीनी वन्दना)
लक्ष्य है ऊँचा हमारा, हम विजय के गीत गाएं।
चीरकर कठिनाइयों को, दीप बने हम जगमगाएं ॥
तेज सूरज-सा लिए हम, शुभ्रता शशि सी लिए हम
पवन-सा गति बेग लेकर, चरण ये आगे बढ़ाएं ॥१॥
हम न रुकना जानते हैं, हम न झुकना जानते हैं।
हो प्रबल संकल्प इतना, सफल हो सब कल्पनाएं ॥२॥
हम अभय निर्मल निरामय है अटल जैसे हिमालय ।
हर कठिन जीवन-घड़ी में फूल बनकर मुस्कराएं ॥३॥
है प्रभो ! पा पन्थ तेरा, हो रहा अब नया सवेरा।
स्वस्थ तन मन, स्वस्थ चिन्तन, चेतना की लौ जलाएं ॥४॥