(लय : मेरा जीवन कोरा)
आत्म-साक्षात्कार, प्रेक्षाध्यान के द्वारा ॥
स्वप्न हो साकार, इस अभियान के द्वारा ॥
१. आत्मना आत्मावलोकन, है यही दर्शन,
अन्तरात्मा में सहज हो, सत्य का स्पर्शन।
क्षीण हो संस्कार, अन्तर्धान के द्वारा ॥
२. मानसिक संतुलन, जागृति और चित समाधि,
निकट आती दूर जाती, व्याधि आधि उपाधि ।
प्रेम का विस्तार, निज संधान के द्वारा ॥
३. बदल जाते हैं रसायन, ग्रन्थियों के स्राव,
बदलते व्यवहार सारे, बदलते हैं भाव।
बदलता संसार, आनापन के द्वारा ॥
४. समस्या आवेग की है विकटतम जग में ,
आदतों की विवशता है, व्याप्त रग-रग में।
हो रहा उपचार, इस अवदान के द्वारा ॥
५. अनुप्रेक्षा और लेश्या,ध्यान कायोत्सर्ग,
श्वास-प्रेक्षा से धरा पर, उतर आए स्वर्ग
हृदय हो अविकार के वल ज्ञान के द्वारा।
हृदय हो अविकार ‘तुलसी’ ज्ञान के द्वारा।