(लय- गुरुदेव दया करके)
जीवन का शुभ अवसर, नई ज्योति जलाई है, हम सब मिलकर देते, तपसी को बधाई है।
तप कठिन साधना है, हर एक न कर पाता,
आगम में गाई है, जिसकी गौरव गाथा
कितनो ने तप करके, महिमा महकाई है.
जब भूख सताती है, मन चंचल हो जाता,
नयनो से नींद उडे, तन ढीला पड़ जाता
आत्मिक बल जगने से, यह हिम्मत आई है.
चंचल मन हम सबका,
नित दौड लगाता है प्रतिदिन खाते पीते, फिर भी ललचाता है, अंतर घट दीप जले, शुभ घडीया आई है।
सिंगापुर के घर-घर, में तप्का लगा मेला, किसीने अठार की, किसका तेला-बेला सबकी साता पूछते, और देते बधाई है