यह विवाह गीत है जो शादी, मांगलिक कार्यक्रमों और पारिवारिक उत्सवों में गाया जा सकता है। A traditional wedding song for marriage ceremonies and family celebrations.
नेमीनाथ जी की जान
नेमजी की जान बणी भारी, देखण को आये नर नारी असंख्या घोड़ा और हाथी, मनुष्य की गिनती नहीं आती। ऊंठ पर ध्वजा जो फहराती, धमक से धरती धर्राती समुद्रविजय जी का लाडला, नेम उन्हों का नाम।
राजुलदे को आये परणवा, अग्रसेन घर ठाम।
प्रसन्न भई नगरी सब सारी ।।१ ।।
नेमजी…..
कसुम्बल बागा अति भारी, कानन कुंडल की छवि न्यारी। किलगी तुर्रा सुखकारी, माला गल मोतियन की डारी। कानो कुण्डल झिगमिगे, शीश मुकुट झलकार।
कोटि भानू की करूं उपमा, शोभा अधिक अपार ।
बाज रह्या बाजा टकसारी ।।२।।
नेमजी की…..
छूट रह्यो उनकी छहराई, ब्याह में आये बड़ भाई।
झरोखे राजुल दे आई, जान को देख के सुख पाई।
अग्रसेन जी देख के, मन में करै विचार।
बहुत जीव करि एकठा, बाड़ो भरयो अपार।
करी सब भोजन को तैयारी।। ३ ।।
नेमजी की…..
नेमजी तोरण पर आये, जीव पशु सबही कुरलाये।
नेमजी वचन जु फरमाये, जीव पशु काहे को लाये।
यो को भोजन होवसी, जान वास्ते ऐह।
ऐह वचन सुणी नेमजी, थर थर कांपै देह।
भाव से चढ़ गए गिरनारी
॥४।। नेमजी की..