(लय- बाबो. अलबलो)
नमो अरहन्तं नमोभंगवतं पार लगाए नौका नमो महामतं
① राग व द्वेष न जिसमे समता सुनाए।
एक ही घाट बकरी शेर आए जाए।
महिमा निराली प्रभु की नमो धैरयवन्तं ॥
② कोईनभाऐ तुमको दिल में बिठाऊं
रात् दिवस क्या पल -२छिन-२धयाऊ
अपने बराबर करलो नमो सिद्धिवंत ॥
एक जनम क्या लाखों जन्म सुधारे
व्याधि उपाधि, आधि सबसे उबारे
तीर्थ पती प्रतिनिधि, नमो त्यागवन्तं ॥
④ महावीर वचनो के ज्ञाता प्रवक्ता
अनमोल रतनों के दाता प्रदाता
शास्त्रों के रक्षक, शिक्षक नमो ज्ञानवत्तं
⑤ उज्वल है काया जिनकी पावन वाणी,
मन के विकार मिट गये तप की निशाणी ।
समता के शिखर पर बैठे नमो सव्व सन्तं ॥
लय – बाबो अलबेलो