यह सांस्कृतिक और परंपरागत गीत है। A cultural and traditional song.
तर्ज (Tune): – भाव भीनी वंदना
भजन के बोल / Lyrics
शुद्ध मन नवकार जप लो, है सदा कल्याणकारी ।
डूबती मझधार नैया, पार कितनों की उतारी।।.
① एक आस्था हो ह्रदय में, एक स्वर हो एक लय में। पंच परमेष्ठी का स्मरण कर, जिन्दगी जिसने निखारी॥
② मंत्रबल से नाग काला, काला, बन गई थी फूलमाला। नाचती थी मौत लेकिन, अमर की जय थी करारी॥
क्यों किसी की शरण जाए, मन्त्र पर आस्था टिकाए
विघ्न टलते हैं पलक में, स्पष्ट इसकी शक्ति भारी ॥
लक्ष्य जपका आत्म शुद्धि, क्षीण होती पापबुद्धि
चित स्थिरता से जपोजप, भवभ्रमण संताप हारी ।।