(लय : मेरा जीवन कोरा कागज)
ज्योतिपुञ्ज ! महान गुरुवर ! ज्योति हम पाएं। भाग्यशाली भक्तगण भगवान को ध्याएं ॥
१. व्यक्तिगत शुभ साधना व्यक्तित्व का आधार,
सुगुरु पर श्रद्धा समर्पण सिद्धियां साकार,
अज्ञ से बन विज्ञ फिर महाप्रज्ञ कहलाए ॥ ज्योतिपुञ्ज.
१२. हृदय है समता सहजता सरलता की खान,
विश्वगुरु के रूप में है बन रही पहचान,
दीर्घ संयम साधना के गीत हम गाएं ॥ ज्योतिपुञ्ज….
३. आयु सर्वाधिक सफल हो भिक्षु-शासन में,
संयमी सबसे बडे हो कामना मन में.
विश्व संयम बन्धुता का पथ अपनाए ॥ ज्योतिपुञ्ज….
५. दीर्घ हो आचार्यकाल विशाल भाल कमाल,
संत सर्वाधिक बने शासन बने सुविशाल, संघ का इतिहास उजला पृष्ठ जुड़ जाए ॥ ज्योतिपुञ्ज….