(लय- मेरा नाम है चमेली)
मेरे मन मे समाये गुरु राज रे, मेरे तन में समा ये गुरु राज रे, रोम रोम में समाये गुरु राज रे, मेरी सांसों में समा ये गुरु राज रे,
जैसे तारों में है चन्दा, जैसे नदी तो में गंगा,लहर लहर में समाये गुरु राज रे —-
जैसे फूलों में सुगंध, जैसे कलियों में रंग,पते पते में समा ये गुरु राज रे —–
जैसे गीता का है ज्ञान, जैसे वेदों में पुराण, पन्ने पन्ने में समाये गुरु राज रे —-
जैसे सीता के है राम जेसै राधा के है श्याम,सबके दिल में समा ये गुरु राज रे —
जैसे दीपक की है ज्योति, जैसे सीपों में है मोती,
मन मनमें समाये गुरु राज रे —