Vandana Mahavir Lo Abhivandana

(लय-दिल के अरमां)

वंदना महावीर लो अभिवंदना, 

भक्ति से पल-पल करें अर्थ्यथना ।। स्थायी ।।

देव ! तुमने देन जग को दी नई, 
रात में भी रोशनी सी हो गई।
 जग उठी हर चेतना में स्पंदना ।।1।।
शांति का संदेश पावन जब दिया,
 शुद्ध कितने पापियों को है किया।
 बोलती हर आतमा में साधना ।।2।।
तुमने नारी को दिया अवसर नया,
 दिल में जागी अलौकिक करूणा दया। 
सहारा पा तर गई सति चंदना ।।3।।
अंहिसा, स्याद्वाद के सिद्धान्त से,
 हो गये आकृष्ट जन उद्घान्त से।
 करें ‘मुनि श्रेयांस’ नित आराधना ।। 4 ।।
(लय-दिल के अरमां)

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