यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
तर्ज (Tune): उंची उंची दुनियां की दीवारें
भजन के बोल / Lyrics
माया ममता मोह का महान बन्धन तोड़के जी तोड़ के हो महावीर, कैसे आप निकले घर छोड़के… २
रुखी सुखी रोटी भी तो हम से छुट नहीं सकती,
सड़ी गली इस वे चीजो से, काया रुठ नीं सकती।
कैसे पकवान छोड़े खाने के राज रसोड़े,
चले गये चहु इस छोड़ के जी.. छोड़ के ॥ हो महावीर…..
फटे पुराने कपड़ो पर पेबन्द लगाये जाते है, जिस दिन नया पहनते उस दिन फूले नहीं समाते है।
असली सोने के गहने, हीरे पन्नो से जड़े,
आभुषण कैसे फेंके, तोड़ के जी तोड़ के ॥ हो महावीर….
छोटा सा घर नहीं छुटता, वर्षा में टप टप करता,
एक एक अंगुल के खातीर भाई-भाई लड़ मरता।इतने बड़े राज को, और सरताज को,पीछे ना देखा मुख मोड़ के जी मोड़ के ॥ हो महावीर….
काली और कुरुप कामिनी, प्राणों से प्यारी होती बच्चा जब बीमार पड़े तो चढ़ झट आंखे भारी होती।
छोड़े कुटुम्बजन, तुम को अनूप धन
मुक्ति बन्धु से नाता-जोड़ के जी जोड़ के ॥ हो महावीर….