तर्ज:- (तुझे सूरज कहूँ या चन्दा)
चिन्तामणी पार्श्व जिनन्दा, वामा माता के नन्दा, करो चिन्ता चूर हमारी, काटो भव-भव का फन्दा।
हम तो दर्शन अभिलाषी, तेरे मन्दिर में आये,
हो जाये धन्य ये जीवन, जो शरण तुम्हारी पाये,
दर्शन कर नाथ तुम्हारा, मन पावे अति आनन्दा ।। १ ।।
तुम तो करुणा के सागर, परमातम, शिवसुखगामी,
हम तो अज्ञानी बालक, तुम तो प्रभु त्रिभुवन स्वामी, दिखलादो ज्ञान की ज्योति ज्यों नभ में चमके चन्दा ।। २ ।।
ये साथी “वोर मंडल” के. बस तेरे ही गुण गाये,
नत मस्तक तव चरणों में, श्रद्धा के सुमन चढ़ाये,
प्रभु तेरा ध्यान लगाये, सब सुर नर और मुनिन्दा ।। ३ ।।