तर्ज : तुम तो ठहरे परदेशी.
ओसीयावाली माता को, चुनड़ी में चढाऊंगा, उनकी प्यारी सूरत को, मन में मैं बसाऊंगा।।
चुनड़ी के तारे तो चम चम चमकतें हैं 2 लाल लाल चुनड़ी में, गौटा भी लगाऊंगा ।।1।। 2
कानों में मैय्या तो कुंडल पहनती हैं गोरे – गोरे 2 गोरे – गोरे हाथों में, मेंहदी मैं रचाऊंगा 2
माथे पे मैय्या के, सोने का छत्र चढ़े – 2 हीरों जड़ा – 2 हीरों जड़ा मुकुट मैं, भेंट में चढ़ाऊंगा ।।3।।
छोटे से “भक्तो” ने, मन में ये सोचा है 2
मैय्या तेरी -2 मैय्या तेरी जय जयकार घर घर गुंजाऊंगा ।।4।।