-: आखिर तो जाणो पड़सी :-
(लय : सुण सुण रे…………)
मत कर रे, मत कर रे
मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं, आखिर तो जाणो पड़सी ॥
१. सुख स्यूं जीणो, सुख स्यूं मरणो, अरिहन्तां रो साचो शरणो । बेटा पोता के करसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥
२. चार दिनां री चमक चान्दणी, पीढ्यां री के आश बांधणी। खुद री करणी खुद भरसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥
३. जड़ चेतन रो भेद समझलै, तन रो नश्वर रूप देखलै। चाल्यां स्यूं मंजिल मिलसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥
४. कसरत कर काया चमकाई, माखण दूध मलाई खाई। कुण जाण्यो अरथी बणसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥
क्रोड़ कमाया, क्रोड़ गमाया, लाखां ऊपर रोब जमाया। अंत बराबर सब होसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥
चेत-चेत अब चेत चेतना, अब तक भोगी किती वेदना। प्रभु भजन स्यूं दुःख मिटसी, आखिर तो जाणो पड़सी ॥