चन्द्रप्रभु स्तवन (लय: शिवपुर नगर सुहामणो)
प्रभु ! चन्द्र जिनेश्वर ! चन्द जिसा।
1. हो प्रभू! चंद जिनेश्वर चंद जिसा, वाणी शीतल चंद सी न्हाल हो। प्रभु! उपशम रस जन सांभल्यां
मिटे करम भरम मोह जाल हो ।
2. हो प्रभु! सूरत मुद्रा सोहनी, वारु रूप अनूप विशाल हो। प्रभु! इंद्र शची जिन निरखता, ते तो तृप्त न होवै निहाल हो ।
3. अहो! वीतराग प्रभु तूं सही, तुम ध्यान ध्यावै चित रोक हो। प्रभु! तुम तुल्य ते हुवै ध्यान सूं, मन पायां परम संतोष हो॥
4. हो प्रभु! लीनपणै तुम ध्यावियां, पामै इंद्रादिक नीं ऋद्धि हो। बलि विविध भोग सुख संपदा, लहै आमोसही आदि लब्धि हो ।
5. हो प्रभु ! नरेंद्र पद पामै सही, चरण सहित ध्यान तन मन्न हो। प्रभु! अहमिंद्र पद पामै बलि, कियां निश्चल थारो भजन्न हो।
6. हो प्रभु ! शरण आयो तुझ साहिबा, तुम ध्यान धरूं दिन-रैन हो। तुझ मिलवा मुझ मन उमह्यो, तुम समरण स्यूं सुख चैन हो ।
7. हो प्रभु! संवत उगणीसै नैं भाद्रवै, सुदि तेरस नैं बुधवार हो। प्रभु! चंद जिनेश्वर समरिया, हुओ आनन्द हरष अपार हो॥
लय: शिवपुर नगर सुहामणो