“Bhawani Thare Hatha Me”

भवानी थारै हाथां में

(तर्ज : होलिया……)
भवानी थारै हाथां में, भवानी थारै हाथां में, चढयो है मेंहदी रो रंग, भवानी थारै हाथां में, रची है लाल सुरंग, भवानी थारै हाथां मै ।।
सात सुहागण घोल के ल्यायी, मैय्याजी के हाथ रचायी, हिवड़े में भर उमंग, भवानी
ऐसो गहरों रंग चढ़ाई, ना छूटै अब लाख छुटाई, देख कै रहग्या सारा दंग, भवानी
ज्यूं मैं थारै मेंहदी लगायी, बैया म्हारी करियो सुणायी, टाबरां नै राखिज्यो थे संग, भवानी
भाव भरी माँ मेंहदी ल्यावां, “भक्त” कहवै माँ यूं ही रचावां, उठे है मन में तरंग, भवानी 11 4 11

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