“Fool Samrpit Karta Hu Mai

फूल समर्पित करता हूँ 

(तर्ज : फूल तुम्हें………)
फूल समर्पित करता हूँ मैं, इनको तुम स्वीकार करो, मैय्या तेरे द्वार पे आया, मेरा बेड़ा पार करों ।।
प्रथम पुष्प अर्पित करता हूँ, रणथम्भोर विनायक को, विघ्न विनाशक मंगल कारक, गजानन्द गणनायक को, सब देवन में देव बडे तुम, आकर आसन ग्रहण करो ।। 1 ।।
दूजा पुष्प समर्पित हो शिव, ओधड़दानी दाता को, पुष्प तीसरा अर्पित करता, अपनी संच्चियाय माता को, चौथा नमन है सरस्वती माँ को, मीठा स्वर संचार करो ।। 2 ।।
पंचम अर्पित पवन पुत्र को, छठा भैरू बाबा को, पुष्प सातवां अर्पित करता, घर के पीतर देवा को, भरा रहें भंडार खुशी का, सब देवन को याद करो ।। 3 ।।
सात सुमन की सुंदर माला, सभी भक्त अर्पित करते, ध्यान धरें हम सब देवों का, “सभी भक्त” चित्त धरते, आओ भक्तों “मदन” के संग, मैख्या को फरियाद करो ।। 4 ।।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top