जन्मोत्सव आया है, जन मन हरसाया है। आनन्द छाया है, मौसम मनभाया है। मंगल दिन, अनुपम है, प्यारा लगता है। त्रिशला का हर सपना, सबको अच्छा लगता है ॥
१. महलों में बहारें तुमको पाकर, मां आई, हां आई, त्रिशला हरसाई। सूरज ले आया उजाला, हां उजाला, छाई खुशियां, हर मन मतवाला ॥ मंगल दिन…
२. करुणा का स्रोत बहाया, हां बहाया उपसर्गों में, समभाव सुहाया।
संदेश तुम्हारा पाकर, हां पाकर, जन जन जागा, तिमिर हटा कर ॥ मंगल दिन…
३. मैत्री की धार बहाई, हां बहाई, खुद चल करके, राह दिखाई।
तेरी कल्याणी वाणी, हां वाणी, चाहते सुनना, हर पल प्राणी ॥ मंगल दिन…
४. यह धन्य धरा मुस्काई, मुस्काई, जिन शासन की, बज रही शहनाई। जय जय जय त्रिशला नन्दन, हां नन्दन लो भाव भरा, शत शत वंदन ॥ मंगल दिन…
(तर्ज : क्या खूब लगती हो)