यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
अवसर आया है अवसर आया है अवसर आया है अक्षय तृतीया आज मनाएं तप की महिमा खूब बढ़ाएं प्रभु चरणों में भेंट चढ़ाएं
१. मरुदेवा पाता के नन्दन। नाभिराज के तुम कुल चन्दन। श्रद्धा से हम करते वन्दन ॥
२. कर्म भूमि के प्रथम प्रणेता। प्रथम महीपति, युग के नेता। वने प्रथम मुनि आत्म विजेता ॥
३. हीरे पन्ने माणक मोती। बाबा की मनुहारें होती। जिनकी जगमग करती ज्योति ॥
४. ना कोई देता भोजन पानी। उस युग की जनता अज्ञानी। बाबा तप की एक निशानी ॥
५. तप में पूरा वर्ष बिताया। अक्षय तृतीया का दिन आया। पड़पोते का भाग्य जगाया ॥