(लय- तुम ही मेरे मन्दिर तुम ही मेरी पूजा)
तुमही हो भिक्षु करुणा के आलय तुम्ही प्राण मेरे -2
तुमही हो भिक्षु
ज्योति तुम्ही हो जीवन की अक्षय तुम्ही प्राण मेरे
① तुमको ही यमै भगवान मानू तुमको ही जीवन प्राणदेव मानू तेरे चरण में रहू नित्य तन्मय
ध्यान तुम्हारा प्रातः मै ध्याऊं जिधर भी देखूं तुमको ही पाऊ स विषमय जगत में तुम हो सुधामय
जब तक रहेगा सांसो में स्पंदन, तबतक झुकेंगे दीपा के नंदन जुड़ी मेरी सांसो की तेरे से एक लय
तुमने ही माटी को सोनाबनाया तुमने ही पत्थर मेंफूल खिलाया
मुझको बनादो प्रभो अब निरामय ॥