(लय : नखरालो देवरीया भाभी पर जादू)
त्रिशला रो जायोड़ो, इण दुनियां में जादू करग्यो जादू करग्यो ओ तो जादू करग्यो । त्रिशला रो जायोड़ो…
अन्तरा
चैत सुदी तेरस दिन, राजा सिद्धार्थ घर जायो ।- २ कुण्डलपुर में जन्म लियो है, घर घर आनन्द छायो ॥-२ राज घराने रो सूरजियो, इण दुनियाँ में जादू करग्यो । त्रिशला ॥१ ॥
होले होले झूले पालणे, मन मांही मुस्कावे ।-२
माता गावे लोरी फिर भी, निंदड़ली नहीं आवे ॥-२
हिवड़ रो हालरीयो, इण दुनियाँ में जादू करग्यो ॥त्रिशला ॥२ ॥
ठुमक ठुमक कर चले आंगणे, घुंघरीया झनकावे ।- २ पल में रुठे पल में माने, सब का मन हर्षावे ॥-२
अहिंसा रो पालणीयो, इण दुनियाँ में जादू करग्यो । त्रिशला ॥३ ॥
नरनारी और देवी देवता इण पर वारी जावै ॥ ‘भक्त मण्डल’ रा साथीड़ा, सबने गाय सुनावै ॥ दुखियाँ न तारणीयो, इण दुनियाँ में जादू करग्यो । त्रिशला ॥४ ॥