शूरवीरो को धरा महान राजस्थान है
भिक्षु की जन्म भूमि कंटालिया ग्राम है।
गुलामी की जंजीरों से त्रस्त सारा देश था।
शिथिल विचारों से धर्म निस्तेज था ।।
आषाढी तेरस सन् तैयासी प्यारा है
दीपाजी के लाल (बल्लूशा) जन्मा कुल उजियारा है केलवा के योगी तेरे नाम, का सहारा है।
बचपन प्रखर प्रतिभाकी निशानी है
भिक्षु कीजीवन गाथा प्रेरक कहानी है
हुआ परिणय सुगणी बाई घर आगई
भावना वैराग्य की लेकिन बढ़ती जा रही।
संजोडै दीक्षा लेने का मानस बनाया है,
सुगणी बाई निधन मन भर आया है
जुड़े सतसंग से जीवन को संवारा है?
बना वैराग्य जीवनका सहारा है
दीक्षा
सपने को लेकर जिद पे अड़ी मां दीपा जी
राज करेगा मेरा भीखण पुण्यशाली-2
आये रघुवर दीपाबाई को पुकारा है
आज्ञा देदो मैया तुम्हें वचन हमारा है
सिंह की तरह गूंजेगा लाल तुम्हारा ये -2
मानी दीपा बाई भिक्षु संघ को समर्पित ।
नाम करेगा भिक्षु रघुवर (गुरु वर)पुलकित
ज्ञान ध्यान तप देख जन जन हर्षित
मन में उठे भावों को कर रहे अर्पित
क्रांति के स्वर
राजनगर के श्रावको ने समय पे जगा दिया
बिगुल शिथिलता के विरुद्ध बजा दिया
आगमो के अध्ययन (मंथन) दूर हुआ सारा भ्रम
करवाई वंदना तो चढ़ गया शीतज्वर-2
स्वीकारा भिक्षु ने किया गुरु को इशारा है
नहीं समझे तो किया संघ से किनारा है
केलवा की भूमि पे बही क्रान्तिकीधारा है-॥
घोर था विरोध पर पथिक मजबूत था।
सच्चाई की राह में चला वो क्रांति दूत था ।।
अन्न नहीं पान न्ही मरघट प्रवास था
अंधेरी ओरी से फैला धर्म प्रकाश था
तप की कसोटी कस खुद को निखारा है
बोल पडे द्वैषी ये अटल ध्रुव तारा है
तेरापंथ की स्थापना
तेरह की संख्या से तेरापंथ नाम बन गया
स्वामीजी ने सुन वीरप्रभु को नमन किया
एक ही आचार एक आचारज की आण है
एक ही विचार और एक ही विधान है।
वीर के शासन में तेरापंथ तारण हारा है
तेरा पंथ के त्राता को समर्पण हमारा है।
देवलोक गमन
इच्छामृत्यु धारी ज्योति पहुंची आकाश में
सिरियारी अमर हुई है ईतिहास में
ग्यारह ही आचार्य तीर्थकर समान है।
तेरापंथ तीर्थ श्रद्धा का आस्थान है।
कितने सौभागी पाया संघ प्राण प्यारा है
स्वामीजी के आशीर्वचन का नजारा है।
केलवा के योगी तेरे नाम का सहारा है।।
तेरे ही हवाले अब जीवन हमारा है
नैया मझधारा में है दूर किनारा है