यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
ओम भिक्षु जपो सदा
ओम भिक्षुओम भिक्षु जपो सदा, चाह फले मुक्ति मिले । है नाम मंगलकारी, विघ्न बाधाहारी, विघ्नबाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।।
असहायों का भिक्षु नाम सहारा है-सहारा है,
घोर अमा में करता दिव्य उजारा है, उजारा है,
ओम भिक्षु पंगु को पहाड़ चढाता है,
मूक मनुज को वाणी वर मिल जाता है,
है नाम मंगलकारी विघ्न बाधा हारी,
विघ्न बाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।
ओम भिक्षु… ।।१।।
खाते पीते सोते जगते जो ध्याता-जो ध्याता,
सांस सांस में भिक्षु-भिक्षु जो गाता-जो गाता,
कठिन परिस्थिति में भी वह नहीं घबराता-घबराता,
भिक्षु नाम से अंतर पौरुष जग जाता,
है नाम मंगलकारी विघ्न बाधा हारी,
विघ्न बाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।
ओम भिक्षु… ।।२।।
रुपांजी का खोड़ा टूटा भक्ति से -भक्ति से,
बेड़ी मुक्ति शोभजी सुमिरन शक्ति से -शक्ति से,
संकट की घड़ियां भक्तों में जब आई-जब आई,
भिक्षु नाम से नई चेतना है पाई,
है नाम मंगलकारी विघ्न बाधा हारी,
विघ्न बाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।
ओम भिक्षु… ।।३।।