(लय- यशोमती मैया से बोले नंदलाला)
सतीवरजी (कनकसति)की शीतल, चांदनी सुहायी ।
भारी मना स्यु थाने देवा विदायी
सहजता सरलता करूणा दिल में समाई
वचन मधुरता जाण घोल घोल पायी
जठ भी पधारया भी गणरी-2 ख्यात जमायी
देवा विदाई
बिज्ञ विदुषी आगम-थोकड़ा रा ज्ञाता
गुरुदेव खुद भी थारै गुणा ने सराता
ममता व समता दोन्यू -2 निजारा दिखायी
– देवा विदायी
चारो ही सतियां सागे, विनय विवेकी
एकमेकता की जोड़ी। आंख्या स्यूं देखी,
चित-समाधि में ही -2 साधना समायी –
देवा विदायी-
पेली पधारया जदभी तपो रंग छायो
इण वार आया वो ही नजारो दिखायो
शुभ पगफेरो थारो -2 देव दिखायी
देवा विदायी-
उपकार थारां सतिवर भूल न पावां,
हुई भूल मांस्यूं जो भी, खिम्या दान चावा
मायत हो आप दिल स्यू -2 माफ करावो
महिला मंडल मिलजुल गीतिका सुनाई