Avasr Jagan Ro

अवसर जागण रो

( तर्ज – धरती धोरां री………)

रचयिता : साध्वी अणिमाश्री
अवसर जागण रो – ३
जागण वालो लाभ उठासी । बो ही समझदार कहलासी ।
जश रो झंडो बो फहरासी ।।
जीवन नै अब सफल बणाणो ।
मिनख पणे रो मोल पिछाणो ।उल्टी बातां थे मत ताणो ।।
सपनै सी है जग री माया ।धन यौवन बादल री छाया ।
अस्थिर है आ थांरी काया ।।
काल अनंतो जग में बीत्यो ।
दिन-दिन कर्यो खजानो रीत्यो ।
मन नै अब तक भी नहीं जीत्यो ।।
सूरज उग्यो हुयो उजालो ।
अब तो निज घर नै संभालो ।
खोलो शिवनगरी रो तालो ।।

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