यह जैन तपस्या और अनुमोदना के अवसरों पर गाया जाने वाला आध्यात्मिक गीत है। A spiritual song for Jain Tapasya and Anumodana.
अब तो जाग अरे इंसान !
(तर्ज – कितना बदल गया संसार….)
रचयिता : साध्वी अणिमाश्री
अब तो जाग अरे इंसान !
आया है तूं इस दुनिया में बनकर के मेहमान ।
मोह नींद में अब तक सोया, जो लाया था वह सब खोया
आज पूछ तूं अपने मन को, बीज धर्म का क्यों नहीं बोया
कठिन घड़ी में यही सहारा, कर इसकी पहचान ।।
सब जीवों से रख अपनापन, खुशियों का बरसेगा सावन
बहा प्रेम की धार सदा तूं, खिल जाएगा जीवन शतदल ।
चार दिनों का वास यहां पर, मत कर खींचातान ।।
महापुरुषों का है यह कहना, हर पल सावधान तूं रहना ।
जीवन-पथ में आने वाली, बाधाओं को हंसकर सहना ।
ऐसा हो आयास, अधर पर सजी रहे मुस्कान ।।