(लय मिलों ना तुम तो हम घबराये )
घर एक मंदिर तेरा, मात पिता ही भगवान है,
जो ना ये समझे प्राणी, वो तो बड़ा ही नादान है,
मात पिता की सेवा जैसा, बन्दे और जगत में, कोई काम नहीं है, कोई काम नहीं है,
मात पिता की सेवा करले, खुशियों से झोली भरले, समझ तेरे राम यही है, राधेश्याम यही है,
मात पिता की सेवा जेसा,बन्दे और जगत में, कोई काम नहीं है, कोई काम नहीं है।।
भरम में बन्दे क्यों घिरता है, दर दर क्यों फिरता है, की चारो धाम यही है, की चारो धाम यही है, मात पिता की सेवा जेसा, बन्दे और जगत में, कोई काम नहीं है, कोई काम नहीं है।
सुन ले रे प्राणी तुझको, सारे ये वेद बताए रे,
मात पिता के तन में, सारे देव समाए रे,
सारे देव तू यही मना ले, तू इनको शीश झुका ले,
की ठीक मुकाम यही है, की ठीक मुकाम यही है,
मात पिता की सेवा जेसा, बन्दे और जगत में, कोई काम नहीं है,